'पब्लिक प्लेटफ़ॉर्म'

by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। "क्या बात है आज तो थाली व्यंजनों से सजी है।आज इस परहेजी पर इतनी मेहरबानी किस खुशी मे बहू" स्वाति ने कोई जवाब नहीं दिया।बस मुस्करा दी। "पापा ,आपकी सारी रिपोर्ट नॉर्मल है।अब आपको इज़ाजत दे दी है डॉ साहेब ने,महिने मे एकाध बार परहेजी खा Read more...

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हर आहट पर नज़रें उठती हैं, जैसे कोई करूणामयी गुहार मेरी चौखट तक आती है , किसी मासूम बच्चे की किलकारी सी। दुनिया के मेले में आखिर रह जाते हैं अकेले न कोई साथी नजर आता है न कोई मंज़िल रह जाती है सिर्फ कशिश जो मन को कर देती है बहुत उदास। अकेलेपन में लगता तुम पास हो तुम्हे स्पर्श करने की कोशिश, Read more...

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फीचर्स डेस्क। जैसे ही ट्रेन रवाना होने को हुई एक औरत और उसका पति एक ट्रंक लिए डिब्बे में घुस पडे़। दरवाजे के पास ही औरत तो बैठ गई पर आदमी चिंतातुर खड़ा था। जानता था कि उसके पास जनरल टिकट है और ये रिज़र्वेशन डिब्बा है। टीसी को टिकट दिखाते उसने हाथ जोड़ दिए। " ये जनरल टिकट Read more...

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दर्पन ही नहीं सब कहते मैं अप्सरा ख़ूबसूरत हूँ दादी नानी बहने सखियॉं सब मिल नजर उतारें यौवन ने दी दस्तक नार नवेली तके सब दिनरात गजाला निगाहें गजब शबाब ये अदाएँ जैसे ग़ज़ल यौवन का खिंचाव सहमी बाला बनी मैं रूपगर्विता मैं अप्सरा दिल न किसी को दूँ देख दर्पण शरमाऊँ मैं चाँदनी शीतल मंद पवन सी त Read more...

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चलो नींद से अठखेलियाँ करें हम तुम ख़ामोशियाँ तोड़ें बीते हुए कल को सहेजते हैं फिर से शब्दों को बीजते हैं ग़म ए अतीत को भुलाते हैं ज़ख़्मों की तुरपन करते हैं जीवन गीत दोहराते हैं जीने का फिर करीना सीखते हैं अंतर्मन की आँखों से फिर सपनों का खेत जोतते हैं शब्दों के घने जंगल में इक दूजे को Read more...

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फीचर्स डेस्क। मोती चुगने गयी रे हंसिनी मानसरोवर तीर… बचपन में सुना ये गीत उस समय याद आ गया , जब लंदन के हाइड पार्क की एक झील में हंसों को किलोल करते देखा । अद्भुत नज़ारा था मेरे लिए । लंदन में भले ही ये एक नुमाइश का पक्षी हो , किंतु मेरे लिए माँ सरस्वती का वाहन था । अब तक चित्रों में देखा था , पढ़ा भी था , आज साक्षात दर्शन पा लिए ।  Read more...

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